
मुंबई – स्वातंत्र्यवीर सावरकर को ‘भारत रत्न’ सम्मान देने की मांग हमने कभी नहीं की और न ही करेंगे । स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने स्वयं भी कभी कुछ मांगा नहीं और हम भी कभी नहीं मांगेंगे । उन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया । ‘स्वातंत्र्यवीर’ यह उपाधि उन्हें जनता ने दी है और मैं उसे महत्त्वपूर्ण मानता हूं । अगर सरकार को कुछ करना ही है, तो ‘स्वातंत्र्यवीर’ यह उपाधि आधिकारिक रूप से मान्य करनी चाहिए, ऐसा मत स्वातंत्र्यवीर सावरकर के परपौत्र तथा स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के अध्यक्ष श्री रणजीत सावरकर ने व्यक्त किया । स्वातंत्र्यवीर सावरकर की १४२वीं जयंती के अवसर पर ‘एबीपी माझा’ इस समाचार चैनल द्वारा ली गई साक्षात्कार में स्वातंत्र्यवीर सावरकर को ‘भारत रत्न’ देने के संदर्भ में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने यह विचार प्रकट किया ।

उन्होंने कहा,…
१. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ स्वातंत्र्यवीर सावरकर की नीति के अनुसार ही था । वर्तमान में वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसी स्थिति है । इसे ध्यान में रखते हुए स्वातंत्र्यवीर सावरकर की नीति के अनुसार सरकार को ‘राष्ट्र की संरक्षण नीति’ निर्धारित करनी चाहिए । इसके लिए केंद्रीय संरक्षण विश्वविद्यालय (नेशनल डिफेन्स युनिवर्सिटी) की स्थापना की जानी चाहिए ।
२. स्वातंत्र्यवीर सावरकर युवाओं को प्रिय लगते हैं, क्योंकि उन्होंने कभी अपनी विचारधारा किसी पर थोपने का प्रयास नहीं किया । उन्होंने प्रत्येक बात की विवेचना करने का आग्रह किया । जिस क्षेत्र में आप कार्य करते हैं, वहां राष्ट्रहित में कार्य करने की उनकी शिक्षा थी ।
स्वातंत्र्यवीर सावरकर की ‘बैरिस्टर’ उपाधि प्राप्त करने हेतु सरकार को प्रयास करने चाहिए !

श्री रणजीत सावरकर ने आगे कहा कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैण्ड में ‘ग्रेज इन’ में प्रवेश लिया था । उन्होंने उससे संबंधित सभी परीक्षाएं उत्तीर्ण की थीं ; परंतु इंडिया हाउस में कार्यरत अधिकारियों ने उनके विरुद्ध शिकायतें की थीं । स्वातंत्र्यवीर सावरकर के बडे भ्राता बाबाराव सावरकर को आजीवन कारावास की सजा हुई थी । इसके पश्चात मदनलाल धींगरा ने कर्जन वायली की हत्या की । इस कारण ‘ग्रेज इन’ की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर को उपाधि न दी जाए । स्वातंत्र्यवीर सावरकर जब इंग्लैण्ड में थे, तब उन्होंने किसी भी प्रकार से कानून का उल्लंघन नहीं किया था । अतः उन्हें ‘बैरिस्टर’ उपाधि न देने का निर्णय पूर्णतः अनुचित था । इंग्लैण्ड से स्वातंत्र्यवीर सावरकर की ‘बैरिस्टर’ उपाधि प्राप्त करने हेतु सरकार को अवश्य प्रयास करना चाहिए ।
क्रान्तिकारी वीरों के त्याग का इतिहास भावी पीढी तक पहुंचना चाहिए !
प्राथमिक शिक्षा से ही पाठ्यपुस्तकों में क्रान्तिकारी वीरों का विवरण होना चाहिए । वर्ष १८५७ के स्वातन्त्र्य संग्राम से लेकर लाखों क्रान्तिकारियों ने देश के लिए खून बहाया है । देश को स्वतंत्रता केवल अहिंसा से नहीं, अपितु क्रान्तिकारी वीरों के त्याग से प्राप्त हुई है । उस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सैनिक सीमाओं पर युद्ध कर रहे हैं, तो यह वास्तविक स्वतंत्रता का इतिहास अगली पीढी तक अवश्य पहुंचना चाहिए, ऐसा रणजीत सावरकर ने कहा ।
( और इनकी सुने …) ‘क्या सरकार अब भा.ज.पा. की ही भूमिका अपना रही है ?’ – Udhayanidhi Stalin
देवस्थान भूमि के संदर्भ में सरकारी देवस्थान समिति की पहली बैठक संपन्न हुई !
Mumbai Local Murder : मुंबई में लोकल रेल में सामान्य कारण से यात्री की हत्या, आरोपी बंदी ।
गाय को राष्ट्रमाता घोषित करो ! – पू. किशोरशास्त्री दवे
India UAE BrahMos Deal : संयुक्त अरब अमीरात भारत से ‘ब्राह्मोस’ क्षेपणास्त्र क्रय पर कर रहा है चर्चा !
New FCRA Rules : ‘धार्मिक कृति’ के नाम पर धर्मांतरण करने वालों के विदेशी दान पर केंद्र सरकार का प्रहार