
नई देहली – ´ब्रुक इंडिया´ द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में, देश में गधों की संख्या में तीव्रता से गिरावट आई है । २०१२ से २०१९ के बीच, भारत में गधों की संख्या में कुल ६१.२३ प्रतिशत की गिरावट आई है । केंद्र सरकार के पशुपालन विभाग को प्रतिवेदन सौंपा गया है ।
देश के कुछ हिस्सों में गधे के मांस की बहुत मांग है, क्योंकि ऐसा माना जाता है, कि गधे का मांस खाना शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है । इस कारण गधों की संख्या में कमी आई है । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार, गधे के मांस का उपयोग भोजन के लिए नहीं किया जा सकता है । गधे का मांस खाना विधिसंगत नहीं है ।
जीवन और यौन क्षमता को बढाने वाली चीनी दवा बनाने के लिए, गधे की चमडी का उपयोग होना !
ब्रुक इंडिया के सदस्य शरत वर्मा ने कहा कि, कुछ वर्ष पूर्व चीन के एक व्यक्ति ने भारत के एक व्यापारी से प्रति माह २०० गधे खरीदने के लिए संपर्क किया था । उन्होंने कहा, “मुझे गधे की चमडी चाहिए ।” जीवित गधे, उनकी चमडी एवं मांस का अवैध रूप से निर्यात किया जा रहा है । भारत में ही नहीं, अपितु पूरे विश्व में गधों की संख्या में कमी आने के लिए चीन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी ठहराया जा रहा है । क्योंकि, गधे की चमडी का उपयोग ‘इजियाओ’ नाम की पारंपरिक चीनी औषधि बनाने में किया जाता है । माना जाता है, कि ´इज़ियाओ´ जीवन और यौन शक्ति को बढाने के साथ-साथ अन्य रोगों को ठीक करने में भी उपयोगी है ।
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