संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण की रक्षा के लिए धर्मगुरुओं की सहायता लेगा !
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नई दिल्ली : ‘जलवायु परिवर्तन पर अंकुश लगाने के सभी प्रयासों से, हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि, धर्म ही एकमात्र शक्ति है जो विश्व की बडी जनसंख्या को ‘पर्यावरण योद्धा’ बना सकती है । विज्ञान आंकडे दे सकता है ; किंतु, श्रद्धा ही पृथ्वी को बचाने की इच्छा पैदा कर सकती है ।’ संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यू.एन.ई.पी.) के तहत ‘फेथ फॉर अर्थ’ अभियान के निदेशक डॉ. इयाद अबू मोगली ने यह दावा किया है । विश्व भर के धार्मिक संगठनों, पादरियों और आध्यात्मिक नेताओं की सहायता से २०३० तक पृथ्वी के ३० प्रतिशत हिस्से को उसके मूल प्राकृतिक स्वरूप में रूपांतरित करने का लक्ष्य है ।
| धर्मगुरु बनेंगे इको योद्धा; धार्मिक संगठन दुनिया की चौथी इकोनॉमी, 10% जमीन इन्हीं के पास – Dainik Bhaskar https://t.co/GS09jIrlL6#Faith4Earth
— Iyad Abumoghli (@iyadabumoghli) February 22, 2021
डॉ इयाद कहते हैं कि, ‘विश्व भर के धार्मिक संगठनों को वह समर्थन नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं । विश्व की अस्सी प्रतिशत आबादी धार्मिक नैतिकता का पालन करती है । इससे इन संगठनों की शक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है । अगर इन संगठनों की संयुक्त संपत्ति को मिला दिया जाए तो यह विश्व की चौथी सबसे बडी अर्थव्यवस्था होगी । ये संगठन विश्व की १० प्रतिशत भूमि को नियंत्रित करते हैं । धार्मिक संगठनों में ६० प्रतिशत स्कूल और ५० प्रतिशत अस्पताल हैं । इस शक्ति को मानव कल्याण के लिए मुख्य धारा में लाने के उद्देश्य से ‘फेथ फॉर अर्थ’ अभियान का जन्म हुआ है । इस वर्ष विश्व के धर्मगुरुओं की संसद जेनेवा में होगी । इसमें ’धार्मिक इको-योद्धा’ भी सम्मिलित होंगे । विज्ञान और धार्मिक-आध्यात्मिक नैतिकता के मेल से इस अभियान को व्यापक रूप मिलेगा ।
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