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वैटिकन सिटी – किसी भी प्रकार का आनंद हमें ईश्वर से प्रत्यक्ष स्वरूप में मिलता रहता है । वह कैथोलिक ईसाई अथवा अन्य कुछ नहीं होता, अपितु केवल दिव्य होता है । अच्छे से पका हुआ भोजन और शारीरिक संबंधों के कारण मिलनेवाला आनंद दिव्य होता है, ऐसा विधान ईसाइयों के सर्वाेच्च धर्मगुरु पोप फ्रान्सिस ने किया है, वे इटली के एक लेखक को एक पुस्तक के लिए दी गई भेंटवार्ता के समय बोल रहे थे ।
Pope praises sex and good food as 'divine' pleasures that 'come directly from God' https://t.co/DTOy39GMna
— Daily Mail Online (@MailOnline) September 10, 2020
पोप फ्रान्सिस बोले कि,
१. चर्च ने सदैव अमानवीय और क्रूर आनंद की निंदा ही की है; परंतु दूसरी ओर मानवीय सरल और नैतिक सुख का स्वीकार किया है ।
२. ईश्वर की दृष्टि से जिस नैतिकता में ईर्ष्या नहीं होती, वह कहीं भी सुख देती है । पहले चर्च द्वारा इस बात का पालन किया जाता था; परंतु धीरे-धीरे ईसाइयों के संदेश का गलत अर्थ लगाया जाने लगा ।
३. भोजन का आनंद आपको नीरोगी रखता है । उसी प्रकार यौन सुख आपको प्रेम और सुंदर बनाता है । इस कारण भिन्न प्रजातियों का अस्तित्व भी बना रहता है ।
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