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मुंबई – जिनके घर में मृत्यु हुई है, उनके प्रति हम शोक व्यक्त करते हैं । उनके दुःख में हम भी सहभागी हैं; किन्तु प्रत्येक देश के विवाद उसी देश तक सीमित रहने चाहिए । उन्हें अन्य स्थानों पर नहीं लाना चाहिए । ईरान को उसका विवाद ईरान में ही रखना चाहिए । अमेरिका को उसका विवाद अमेरिका में रखना चाहिए । आज विश्वभर में जो आंदोलन हो रहे हैं, हम उनका कडा विरोध करते हैं, चाहे वे आंदोलन भारत में हो रहे हों या पाकिस्तान में । इसका कारण यह है कि जो व्यक्ति मारे गए हैं, वे हमारे मार्गदर्शक नहीं थे । वे हमारे प्रमुख नहीं थे । संपूर्ण विश्व का शिया समुदाय इराक के अयातुल्ला सिस्तानी को मानता है । ईरान के किसी भी मौलवी को हम नहीं मानते, ऐसी भूमिका ‘ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड’ के उपाध्यक्ष मौलाना हसन अली रजनी ने व्यक्त की है ।
पैसे देकर आंदोलन कराए जा रहे हैं – ऐसा आरोप
मौलाना रजनी ने आगे गंभीर आरोप लगाया । उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक रूप से यहां पैसे देते हैं एवं पूरे विश्व में आंदोलन करवाकर वातावरण बिगाड़ देते हैं । कुछ दिन पूर्व ही हमारे कुछ लोगों ने पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास पर आक्रमण किया एवं उसके उपरांत हुई जवाबी कार्रवाई में ३५ शिया मारे गए । बांग्लादेश में भी लोगों की मृत्यु हुई, कतर में मुसलमान मारे गए । पूरे विश्व में मुसलमान ही मारे जा रहे हैं । हम उनसे केवल यही आग्रह करते हैं कि वे अपने देश के प्रति निष्ठावान रहें । इन बातों को अपने देश तक ही सीमित रखें ।
दुनिया भर में २ करोड मुसलमान मारे गए; परंतु भारत से कोई मुसलमान नहीं बोलता !
मौलाना रजनी ने आगे कहा कि पिछले ४० वर्षों में २ करोड से अधिक मुसलमान मारे गए हैं; किन्तु भारत का कोई भी मुसलमान इस विषय में नहीं बोलता । परंतु यदि भारत में कोई मुसलमान मर जाता है, तो विश्व की सभी समाचार चैनल यह दिखाने लगती हैं कि भारत में मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है । आप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम या चित्र किसी दूसरे देश में नहीं ले सकते; लेकिन हमारे देश में विदेशी नेताओं की तस्वीरें रखी जाती हैं, उनके झंडे भी फहराए जाते हैं एवं उनके मरने पर लोग आंदोलन करते हैं ।
मोहर्रम की जुलूस में खामेनेई का चित्र नहीं रखना चाहिए !
मौलाना रजनी ने स्पष्ट किया कि खामेनेई के समर्थन में आंदोलन नहीं होने चाहिए । यदि मोहर्रम की जुलूस में खामेनेई का चित्र रखा गया, तो हम भी नरेंद्र मोदी का चित्र रखेंगे । इसके लिए हमें जेल में डाल दिया जाए तो भी हमें स्वीकार है । यदि हम अपने प्रधानमंत्री का नाम लेते हैं, तो हमें ‘आतंकवादी’ कहा जाता है; परंतु ये लोग दूसरे देशों के नेताओं के नाम एवं चित्र लेकर आंदोलन करते हैं, दूतावासों पर आक्रमण करते हैं, तो क्या वे ‘आतंकवादी’ नहीं कहलाते ? हम इसका कडा विरोध करते हैं । विश्वभर में ऐसे आंदोलन नहीं होने चाहिए । साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व के सभी शिया ईरान के साथ नहीं हैं; केवल कुछ लोग ही उनके साथ हैं ।
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