‘सनातन प्रभात’ के विषय में सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के उद्बोधक विचार

‘विभिन्न समाचारपत्रों में समाज में प्रतिदिन होनेवाली केवल अप्रिय घटनाओं के समाचार दिए जाते हैं; परंतु ‘उसके संदर्भ में क्या दृष्टिकोण होना चाहिए ? तथा ऐसी घटनाएं पुनः न हों; इसके लिए क्या उपाय करने चाहिए ?’, इसके संदर्भ में कोई भी नियतकालिक उद्बोधन नहीं करता । ऐसा केवल ‘सनातन प्रभात’ के नियतकालिकों में ही बताया जाता है ।’
केवल अप्रिय घटनाओं के समाचार देनेवाला नहीं; अपितु ऐसी घटनाएं पुनः न हों इसके लिए उपाय बतानेवाला भी एकमात्र नियतकालिक ‘सनातन प्रभात’ !
‘अधिकांश समाचार पत्र समाज में घटित होनेवाली अप्रिय घटनाओं के केवल समाचार ही देते हैं । सर्वसामान्य लोग ऐसे समाचार केवल पढते हैं तथा उनकी अनदेखी करते हैं । ‘सनातन प्रभात’ भी ऐसे समाचार देता है; परंतु उसमें ‘वैसी घटना पुनः न हो; इसके लिए क्या करना चाहिए ?’, साथ ही इस संदर्भ में समाज के एक घटक के रूप में पाठक को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए ?’ इत्यादि पाठकों को बताता है । उसके कारण ‘ऐसी घटनाएं पुनः न हों’, इसके लिए पाठकों को उचित दृष्टिकोण मिलता है तथा उस प्रकार से उनकी विचार प्रक्रिया होती है । यही विचार प्रक्रिया आगे जाकर आदर्श हिन्दू राष्ट्र के लिए सहायक सिद्ध होगी ।’
– (सच्चिदानंद परब्रह्म) डॉ. आठवले (२०.११.२०२१)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !