फरवरी २०२० में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के कारण आज भी हिन्दू भयभीत !
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नई देहली – नागरिकता सुधार अधिनियम और राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण अधिनियम के विरोध में, फरवरी २०२० में दिल्ली में कट्टरपंथियों ने दंगे भडकाए थे । कट्टरपंथियों के क्षेत्रों में हुए दंगों में कुल ५३ लोग मारे गए थे और ७०० से अधिक घायल हुए थे । दो वर्षों के उपरांत भी, इन क्षेत्रों में रहने वाले हिन्दुओं के अंतरमन में अत्याचार के व्रण आज भी वेदना दे रहे हैं । वे अभी भी इन क्षेत्रों से पलायन कर रहे हैं ।
पीडित हिन्दू परिवारों ने पुलिस की सहायता प्राप्त करने के उद्देश से ‘पुलिस जनसभा’ का आयोजन किया था । बैठक के लिए, उत्तरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त संजय सेन को आमंत्रित किया गया था । बैठक में, पीडित हिन्दू परिवारों ने उन्हें पलायन करने के लिए बाध्य होने के कारण बताए । इसपर पुलिस उपायुक्त सेन ने हिन्दुओं को आश्वासन दिया, कि उनकी समस्या के समाधान के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया गया है और इस मुद्दे पर ‘अन्य समुदाय’ के लोगों के साथ चर्चा की जा रही है । (पुलिस स्पष्ट करे कि ‘अन्य समुदाय’ कौन है ! – संपादक)
२ वर्षों पूर्व घटित दंगों के संदर्भ में दिल्ली उच्च न्यायालया ने कहा था, कि ये दंगे अचानक नहीं हुए थे, अपितु वे एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र के कारण हुए थे ।
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