
रामनाथी (गोवा) – नम्रता, निरपेक्ष प्रीति आदि दैवी गुणों से युक्त और परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के प्रति अनन्य भाव रखनेवालीं तथा वर्तमान में सनातन के रामनाथी आश्रम में निवास कर रहीं सनातन की ८६ वीं संत पू. शालिनी माईणकरजी (आयु ९२ वर्ष) ने ११ मई को रात १.३८ पर देहत्याग किया । वे मूलत: वास्को (गोवा) की निवासी थीं । उनके पार्थिव पर १२ मई को भावपूर्ण वातावरण में अंतिम संस्कार किया गया । पू. माईणकरजी के पश्चात ३ पुत्रियां, जमाई, पौत्र और प्रपौत्र ऐसा परिवार है । उनकी नातिन ६६ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कु. सोनल जोशी सनातन के रामनाथी आश्रम में पूर्णकालीन साधना करती हैं और उनकी कन्या श्रीमती अनुराधा पुरोहित, श्रीमती मेधा जोशी और श्रीमती सुधा जोशी भी साधना कर रही हैं ।
मूलत: सात्त्विक वृत्ति और अल्प अहं आदि गुणोंवाली पू. माईणकरजी ने गृहस्थी के प्रत्येक कठिन प्रसंग का सहनशीलता से सामना किया । प्रत्येक प्रसंग उन्होंने ‘ईश्वरेच्छा’ मानकर स्वीकार किया और ‘अध्यात्म प्रत्यक्ष आचरण में कैसे लाएं ?’, इसकी सीख सभी को दी । ‘देह से गृहस्थी में रहकर भी चित्त रहे चरणों में’, ऐसी स्थिति तक पहुंची पू. माईणकरजी की अंतर्मन से साधना होती रही । रामनाथी आश्रम में रहकर उन्होंने साधकों पर प्रीति का वर्षाव किया । उनकी सगुण सेवा से साधकों को चैतन्य प्राप्त हुआ और आध्यात्मिक स्तर पर अत्यधिक लाभ हुआ ।
अपनी सहज बातचीत एवं सरल व्यवहार से भक्तों को सिखानेवाले प.पू. भक्तराज महाराजजी !
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों को किया गया अनमोल मार्गदर्शन !
हिन्दू धर्मप्रेमी युवक-युवतियों, ऋषि-मुनियों तथा देवताओं द्वारा की जानेवाली स्थूल कृतियों के पीछेका सूक्ष्म धर्मशास्त्र समझे बिना उनका अनुकरण न करें ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ
‘श्रीसत्शक्ति, श्रीचित्शक्ति और सच्चिदानंद’ अध्यात्म के शब्दब्रह्म हैं तथा उनमें अत्यधिक शक्ति विद्यमान होती है और उन शब्दों का उच्चारण करने पर उनसे शक्ति, चैतन्य एवं तत्त्व प्राप्त होता है ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी
प.पू. भक्तराज महाराजजी के पावन सान्निध्य की कुछ हृदयस्पर्शी स्मृतियां !