मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद कांग्रेस ने खो दी राजनीतिक दिशा ! – प्रणब मुखर्जी की पुस्तक में दावा

  • कांग्रेस के आंतरिक कलह अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं । जो पार्टी जो अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं को दिशा नहीं दे पाई है, वह पार्टी लोगों को क्या दिशा देगी?

  • मुखर्जी ने कांग्रेस में विद्यमान वंशवाद की बात पहले क्यों नहीं उजागर की? यह ध्यान में लें कि पार्टी के पतन के लिए जैसे गांधी वंश उत्तरदायी है, उसी प्रकार तुष्टीकरण करनेवाले पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी इसके लिए उतने ही उत्तरदायी हैं ।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

नई देहली : मेरी पार्टी के कुछ सदस्यों का मानना था कि अगर मैं २००४ में प्रधानमंत्री होता, तो कांग्रेस पार्टी २०१४ का लोकसभा चुनाव इतनी बुरी तरह से नहीं हारती; लेकिन मैं इस राय से सहमत नहीं हूं । मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद पार्टी नेतृत्व ने अपनी राजनीतिक दिशा खो दी । जबकि सोनिया गांधी पार्टी प्रकरणों को संभालने में असमर्थ थीं, बडी मात्रा में संसद से अनुपस्थित रहने के कारण सांसदों के साथ डॉ मनमोहन सिंह के व्यक्तिगत संबंध समाप्त हो गए थे । पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अगले महीने प्रकाशित होने वाली अपनी पुस्तक ‘द प्रेसिडेंशियल इयर्स’ में यह दावा किया है । यह पुस्तक मुखर्जी ने अपनी मृत्यु से पूर्व लिखी थी । इस पुस्तक के कुछ अंश अभी सामने आए हैं । पुस्तक में प्रणब मुखर्जी द्वारा बंगाल के एक गांव में व्यतीत बचपन से लेकर उनके राष्ट्रपति बनने तक की यात्रा का वर्णन है ।

इस पुस्तक में मुखर्जी लिखते हैं, ‘मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री को शासन करने का नैतिक अधिकार है । देश की संपूर्ण शासन-प्रणाली प्रधान मंत्री एवं उनके प्रशासन के कामकाज में परिलक्षित होती है । पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को गठबंधन को बचाने का सुझाव दिया गया था जो सरकार पर भारी पडी ।

https://youtu.be/JHmRvLBJLsg

(सौजन्य : ABP Majha)