नेपाल, श्रीलंका, मालदीव आदि भारत के पडोसी देशों को ऋण में फंसाकर चीन उन पर हावी होने का प्रयास कर भारत को बडी चुनौती दे रहा है । यह देखते हुए सरकार को समय रहते चीन को रोकना चाहिए ।

माले (मालदीव) – चीन ने अपनी विस्तारवादी दुष्ट आकांक्षा के कारण मालदीव को ऋण में फंसाया है । मालदीव पर चीन का ३.१ अब्ज डॉलर का ऋण है । मालदीव की पूरी अर्थव्यवस्था पांच अब्ज डॉलर की है ।
मालदीव के पूर्व प्रधान मंत्री महम्मद नशीद ने कहा है कि इसमें सरकारी तथा निजी उद्योगगों को दिया ऋण तथा विविध क्षेत्रों में किया भुगतान भी समाविष्ट है । इसके लिए मालदीव सरकार ने भरोसा दिया है । चीन इससे मालदीव सरकार को अपने जाल में फंसा सकता है । मालदीव सरकार इस ॠण को न चुका सके तो उसकी हालत श्रीलंका जैसी हो जाएगी । चीन का ॠण न चुका सकने के कारण हाल ही में उनका महत्वपूर्ण बंदरगाह हंबनटोटा उन्हें चीन को निन्यानबे वर्षाें के समझौता-भाडे (लीज पर) पर देना पडा है । इसी प्रकार चीन ने लाओस प्रांत के पावर ग्रीड में प्रवेश किया है । वर्ष २०१३ में मालदीव के चीन समर्थक अब्दुला यामीन सरकार ने बडी परियोजनाओं के नाम पर चीन से ऋण लिया था वही ऋण वर्तमान सरकार की आपदा बन गया है ।
भारत का सरदर्द भी बनने सम्भावना !
नब्बे सहस्र चौ.कि.मी.क्षेत्र में फैला मालदीव भारत के लिए महत्वपूर्ण देश है । मालदीव की समुद्री सीमा से भारतीय बेट मिनिक्वाय केवल सौ कि.मी. की दूरी पर है, तो केरल के दक्षिण से मालदीव छः सौ कि.मी. की दूरी पर है । चीन भारत के हिन्द महासागर को भी नियंत्रण में लेने के प्रयास में है मालदीव के युद्धशास्त्रीय महत्व ध्यान में रखकर ही चीन ने मालदीव को ऋण में फंसाया है ।
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