Consumer Court Orders Railway : यात्रियों को २० सहस्र रुपये मुआवजा देने का उपभोक्ता आयोग का रेलवे को आदेश

  • आरक्षित टिकट होने के उपरांत भी, ४ यात्रियों को खडे होकर यात्रा करनी पडी, यह प्रकरण

  • यात्रियों की सीटों पर बैठे थे रेलवे कर्मचारी !

पाटलीपुत्र (बिहार) – राज्य के ‘भोजपुर जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग’ ने टिकट होने के उपरांत भी, यात्रियों को खडे होकर यात्रा करनी पडी, इस प्रकरण में रेलवे को २० सहस्र रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है ।

१. ‘एलटीटी पटना एक्सप्रेस’ में ४ यात्री विंध्याचल से आरा तक यात्रा कर रहे थे । यात्रा से पहले उन्होंने टिकट खरीदे थे । ‘बी-4’ कोच में उनकी सीटें आरक्षित थीं; परंतु वहां पहले से कुछ लोग बैठे हुए थे । पूछताछ करने पर पता चला कि वे रेलवे कर्मचारी थे । उन कर्मचारियों ने सीट खाली करने से अस्वीकार कर दिया ।

२. यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों से परिवाद कर सहायता मांगी; परंतु उन्हें कोई सहायता नहीं मिली । इसके कारण चारों यात्रियों को खडे होकर यात्रा करनी पडी । यात्रियों ने रेलवे सेवा एवं रेल मंत्रालय से भी परिवाद किया; परंतु उसकी भी कोई सुनवाई नहीं हुई । (इसके लिए उत्तरदायी लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए ! – संपादक) अंततः यात्रियों ने ‘भोजपुर जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग’ का दरवाजा खटखटाया ।

३. आयोग ने इस प्रकरण में उत्तर मध्य रेलवे एवं रेल मंत्रालय को यात्रियों के आरक्षण शुल्क (१ सहस्र ८७६ रुपये) तथा उस पर ८ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित कुल २० सहस्र रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया । आयोग ने रेलवे को ६० दिनों के भीतर यह राशि देने का निर्देश दिया है । साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि ६० दिनों के भीतर रुपए नही दिए गए तो शेष राशि पर १० प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाया जाएगा ।

संपादकीय भूमिका

रेलवे को यह राशि इन कर्मचारियों से वसूल कर उन्हें नौकरी से निलंबित कर देना चाहिए !