हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘शिवराज्याभिषेक दिवस’ के उपलक्ष्य में आयोजित हिन्दी भाषा में ‘ऑनलाइन’ विशेष संवाद


पुणे (महाराष्ट्र) – ”मुगलों के अत्याचार से जनता त्रस्त थी और महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे थे । ऐसे समय में छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने बचपन में ही सामान्य जनता, श्रमिक और किसानों को संगठित कर अपनी सेना खडी की । उनमें देवता, देश एवं धर्म की रक्षा हेतु स्वाभिमान जागृत किया । उससे ही आगे जाकर तानाजी, सूर्याजी जैसे शूरवीर तैयार हुए । चतुराई एवं युद्धकौशल के बल पर उन्होंने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना की । आज हमें उसी नीति का अनुकरण करना है; क्योंकि आज भारत पर कट्टरतावादी जिहादी, राष्ट्रविरोधी शक्तियां और भ्रष्टाचारी नेताओं का आक्रमण हो रहा है । इसका एकमात्र विकल्प यह है कि हम सभी छत्रपति शिवाजी महाराजजी की नीति का अनुकरण करते हुए देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने हेतु संगठित हों !” श्रीराम सेना के संस्थापक अध्यक्ष श्री. प्रमोद मुतालिक ने ऐसा प्रतिपादित किया ।
हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘शिवराज्याभिषेक दिवस’ के उपलक्ष्य में ६ जून को ‘छत्रपति शिवाजी महाराजजी का हिन्दू राष्ट्र’ विषय पर हिन्दी भाषा में ‘ऑनलाइन’ विशेष संवाद का आयोजन किया गया था । उसमें वे ऐसा बोल रहे थे । इस संवाद में ‘सुदर्शन न्यूज’ के संस्थापक-संपादक श्री. सुरेश चव्हाणके, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने भी संबोधित किया । इस कार्यक्रम का ‘फेसबुक’ एवं ‘यू ट्यूब’ के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया । समिति के युवा संगठक श्री. सुमित सागवेकर ने कार्यक्रम का सूत्रसंचालन किया ।
हिन्दुओं के साथ अन्याय करनेवाले संविधान में समाहित प्रावधानों में सुधार लाने हेतु जनमत का दबाव बनाएं ! – सुरेश चव्हाणके

छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना की; परंतु स्वतंत्रता पश्चात काल में महाराज को अपेक्षित राष्ट्र का निर्माण करने में हम बहुत अल्प पडे । स्वतंत्रता पश्चात काल में ‘हिन्दू राष्ट्र’ की संकल्पना को छोड दिया गया । आज अनेक स्थानों पर धर्मांध हिन्दुओं पर अत्याचार कर रहे हैं । देश में अनेक ‘मिनी पाकिस्तान’ बन गए हैं । यह छत्रपति शिवाजी महाराज की अपेक्षा के अनुरूप नहीं है । वर्तमान व्यवस्था ‘भार हिन्दू राष्ट्र’ है, ऐसा नहीं मानती, यह वास्तविक पीडा है । इसीलिए संविधान में समाहित जिन प्रावधानों के आधार पर धर्मांध, वामपंथी और आधुनिकतावादी हिन्दुत्व को अपना लक्ष्य बनाते हैं, उसमें सुधार लाने हेतु प्रयास करना आवश्यक है । जब देश में हिन्दुत्व एवं राष्ट्रीयता से भरा वातावरण उत्पन्न होता है, तब हिन्दूविरोधी जनप्रतिनिधियों को भी ‘हिन्दू कार्ड’ खेलना पडता है । इसे ध्यान में लेकर हिन्दुओं के साथ अन्याय करनेवाले संविधान में समाहित प्रावधानों में सुधार लाने हेतु जनमत का दबाव बनना आवश्यक है ।
फिल्म और धारावाहिकों के माध्यम से मुसलमानों का उदात्तीकरण करना विकृत इतिहास फैलाने का निंदाजनक प्रयास ! – रमेश शिंदे

‘छत्रपति शिवाजी महाराजजी की सेना में अनेक सैनिक मुसलमान थे’, ऐसा बताकर महाराज को ‘सेक्युलरवादी’ प्रमाणित करने का प्रयास हो रहा है । तो इस तर्क के आधार पर औरंगजेब की सेना में भी हिन्दू सरकार थे; इसलिए क्या ये लोग औरंगजेब को ‘सेक्युलर’ प्रमाणित करेंगे ? यदि औरंगजेब सेक्युलर होता, तो क्या वह मंदिरों को तोडता ? छत्रपति शिवाजी महाराज सहिष्णु थे; किंतु वे धर्मांधों के अत्याचार सहन करनेवाले नहीं थे । स्वयं छत्रपति संभाजी महाराजजी ने २७ अगस्त १६८० को लिखे गए दानपत्र में शिवाजी महाराज का ‘म्लेच्छक्षयदीक्षित (अर्थात अत्याचारी मुसलमानों के संहार की दीक्षा लिए हुए)’, ऐसा उल्लेख किया है । छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने सितंबर १६७७ में व्यंकोजी राजे को लिखे गए पत्र में व्यंकोजी राजे से अपनी सेना में मुसलमान सैनिकों को सम्मिलित करने के संदर्भ में पूछा है । मिर्जाराजा जयसिंह को लिखे गए पत्र में छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने उन्हें देवता-धर्म की रक्षा हेतु हिन्दुओं के पक्ष में तथा मुसलमानों के विरुद्ध घर्ष करने का आवाहन किया है ।
छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने धर्मांतरण करनेवाले पादरियों के सिर काट डाले । धर्मांतरित हिन्दुओं का शुद्धीकरण कर उन्हें पुनः हिन्दू धर्म में ले आए । डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान सभा में दिए अपने भाषण में, ‘हिन्दुओं की स्वतंत्रता हेतु संघर्ष करनेवाले शिवाजी महाराज’, ऐसा उल्लेख किया है । वास्तविक दृष्टि से हिन्दू राजा होते हुए भी आजकल धारावाहिकों और फिल्मों में शिवाजी महाराज के जीवन के प्रसंग दिखाते समय मुसलमानों का उदात्तीकरण किया जाता है । यह विकृत इतिहास फैलाने का निंदनीय प्रयास है ।
छत्रपति शिवाजी महाराज ‘सेक्युलरवादी’ नहीं, अपितु हिन्दू धर्मरक्षक ! – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी

स्वतंत्रता पश्चात के काल में हिन्दुओं के पराक्रम का इतिहास पढाया नहीं गया, अपितु क्रमिक पुस्तकों में विदेशी आक्रमणकारियों का उदात्तीकरण किया गया । आज भी छत्रपति शिवाजी महाराजजी की ‘सेक्युलरवादी’ प्रतिमा बनाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है । व्यक्तिगत जीवन में छत्रपति शिवाजी महाराज धर्मपरायण थे, साथ ही उनका राजधर्म भी सनातन हिन्दू धर्म के मूल्यों पर आधारित था । वे ‘सेक्युलरवादी’ नहीं, अपितु हिन्दू धर्मरक्षक थे ।
सनातन धर्म में राजा श्रीविष्णु का अवतार होता है, यह मान्यता है । उसके अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराजजी का राज्याभिषेक समारोह पूरे ९ दिनों तक हिन्दू वैदिक पद्धति से संपन्न हुआ । पुण्याहवाचन, नक्षत्रशांति, ग्रहशांति, यज्ञयाग, सुवर्णतुला, गुरुजनों का पाद्यपूजन जैसी विधियां संपन्न की गईं । काशी के ब्राह्मणों ने उनका राज्याभिषेक किया । अष्टप्रधान मंडल की रचना की । संस्कृत में अपनी राजमुद्रा बनाकर संस्कृत को राजमान्यता दिलाई । विदेशी शब्द हटाने हेतु राजव्यवहारकोष तैयार किया । जहां मंदिरों को गिराकर मस्जिदें बनाई गई थीं, वहां मंदिरों की पुनर्स्थापना की । आदिलशाह को मिलने जाते समय उन्होंने गोहत्या करनेवाले कसाई का हाथ काट दिया । क्या ‘सेक्युलर’ विचारधारावाला राजा कभी ऐसा करेगा ? छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने हिन्दवी स्वराज्य स्थापना की शपथ ली और वह भी रायरेश्वर मंदिर में ! वे सदैव ‘जगदंब-जगदंब’ नामजप करते थे । छत्रपति शिवाजी महाराज हिन्दू साम्राज्य के सम्राट तथा हिन्दू धर्मरक्षक थे, इससे यह स्पष्ट होता है ।
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