उत्तराखंड में भाजपा की सरकार होते हुए आयोजित होने वाले कुंभ मेले के नियोजन के कारण संत, महंत अप्रसन्न हो रहे होंगे, तो इसका विचार सरकार को करना चाहिए !

हरिद्वार (उत्तराखंड) – राज्य सरकार अपनी गलतियां छुपाने के लिए कोरोना की आड में लिए निर्णय संतों के माथे मढ रही है, ऐसा आरोप अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने किया है । कुंभ मेला की कालावधि और संतों को सुविधाएं न उपलब्ध कर पाने के कारण उन्होंने सरकार पर टिप्पणी की । सन्यासी अखाडा और संतों से चर्चा करने के बाद वे बोल रहे थे । सन्यासी अखाडों को सरकार की ओर से सुविधा न मिल पाने के कारण उनकी अप्रसन्नता के चलते महंत गिरि उनसे मिलने गए थे ।
महंंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि, प्रयागराज और वृंदावन के कुंभ में हमें कोई भी परेशानी नहीं हुई, तो देव भूमि में परेशानी कैसे आ सकती है ? अखिल भारतीय अखाडा परिषद को बताकर मुख्यमंत्री ने ४ राजयोगी स्नान की घोषणा की थी; लेकिन संतों को विश्वास में लिए बिना उसकी संख्या २ कर दी और कुंभ की कालावधि कम कर दी । संत सरकार के निर्णय स्वीकार करने को तैयार नहीं ।
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