ईश्वरीय राज्य का कल्पनातीत महत्त्व !

‘अनेक अपराध कर आत्महत्या करनेवाले को सरकार कैसे दंड देगी ? परन्तु ईश्वर देते हैं । इससे यह पता चलता है कि ईश्वर का राज्य कितना कल्पनातीत है । इसलिए ईश्वरीय राज्य की स्थापना हेतु प्रयत्नरत रहें !’ – (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले
ग्रंथवाचन एवं ग्रंथों के लिए चिन्हित कतरनों से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का ध्यान में आया ईश्वरत्व !
कर्मयोग, ज्ञानयोग एवं भक्तियोग के क्रम में हुई परम पूज्य डॉक्टरजी की आध्यात्मिक यात्रा
भूतल पर सर्वश्रेष्ठ जन्म अर्थात हिन्दू धर्म में जन्म मिलना ! -सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा वर्ष १९८१ में सम्मोहन उपचार संबंधी अवधारणाओं के विषय में किया गया लेखन
हिन्दुओ, कालानुसार साधना के रूप में श्रीरामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करें !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार