१. कुंभ पर्वकी महिमा (कुम्भपर्वक्षेत्र एवं कुम्भमेलों की विशेषताआें सहित)

२. कुंभ मेलोंमें कुछ साधुआेंका पाखंड (सन्तोंद्वारा अपेक्षित कार्य भी अन्तर्भूत)

३. कुंभ मेलोंकी वर्तमान दुःस्थिति (नेताआेंका हिन्दू-द्वेष एवं हिन्दुत्वनिष्ठोंकी भी उदासीनता !)

कुंभ मेले की विशेषताएं, कुंभ पर्वक्षेत्र की महानता, कुंभ क्षेत्र में करने-योग्य धार्मिक कृत्य, धर्मरक्षक अखाडों का महत्त्व, हिन्दू धर्म के उत्थान की दृष्टि से कुंभ मेले के कार्य, तथाकथित साधुआें का व्यवहार तथा इस पृष्ठभूमि पर खरे साधु-संतों द्वारा अपेक्षित कार्य, कुंभ मेलों की दु:स्थिति हेतु उत्तरदायी विविध कारक (उदा. वंदनीय साधु-संतों की प्रशासन द्वारा उपेक्षा, पुलिस का अशोभनीय आचरण, राज्यकर्ताआें द्वारा २०१५ के कुंभ मेले के नियोजन की अनदेखी)
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अधर्म का उत्तर अधर्म से ही देने की भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा को हिंदुओं द्वारा भुला दिया जाना
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अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !
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धर्मांधों और साम्यवादियों की दोहरी भूमिका को समझना आवश्यक है !