हिन्दुओं को संकट की घडी का सामना करना पडा ।

कु. निधि देशमुख

जो नहीं समझे धर्मप्रचार का महत्त्व ।
दुष्प्रचार का बलि उनको चढना पडा ॥ १ ॥

जब करने लगे पश्चिम का अंधानुकरण ।
अपनी चैतन्यमय धरोहर को खोना पडा ॥ २ ॥

नहीं कर सके अपने मानबिंदुओं की रक्षा ।
मान-सम्मान क्या जीवन भी उनको महंगा पडा ॥ ३ ॥

नहीं जागे पडोस में हुए आक्रमणों से ।
अपने और अपनों के सुख चैन को खोना पडा ॥ ४ ॥

जो नहीं सीखे बीते हुए कल से कुछ ।
आज फिर उसी पीडा से गुजरना पडा ॥ ५ ॥

जागो तो अब भी सवेरा है बाकी ।
नहीं तो अंधेरा बहुत गहरा हुआ ॥ ६ ॥

– कु. निधि देशमुख, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (१९.९.२०१७)

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