मातृभूमि के प्रति प्रेम व्यक्त करने कि भावना है ‘वन्दे मातरम्’ ।

‘वन्दे मातरम्’ नहीं बोलेंगे’, ऐसा वक्तव्य जाने कितने धर्मांधों ने किया । राष्ट्रद्रोही सपा विधायक अबु आज़मी ने किया । पुनः प्रकाश आंबेडकर ने भी कहा और ये बार बार हो रहा है । आखिर क्या है ‘वन्देे मातरम्’ ?

श्री. हर्षद खानविलकर

शब्द नहीं मंत्र था वन्दे मातरम् ।
हर क्रांतिकारी का प्राण था वन्दे मातरम् ॥ १ ॥

हर क्रांतिकारी की श्‍वास था वन्दे मातरम् ।
हर क्रांतिकारी का ध्यास था वन्दे मातरम् ॥ २ ॥

हर क्रांतिकारी का जीवन था वन्दे मातरम् ।
फांसी पर चढते हुए भी स्फूर्ति देनेवाले शब्द थे वन्दे मातरम् ॥ ३ ॥

अंग्रेजों को भगानेवाला स्वर था वन्दे मातरम् ।
मातृभूमि की स्वतंत्रता का ध्येय था वन्दे मातरम् ॥ ४ ॥

मातृभूमि के प्रति निष्ठा का सूचक था वन्दे मातरम् ।
बहरी सरकार को सुनाई देनेवाली दृढ पुकार थी वन्दे मातरम् ॥ ५ ॥

शौर्य दिखाने का सामर्थ्य था वन्दे मातरम् ।
तिरंगा हाथ में लेकर छाती पर गोली झेलते हुए कहे, वो शब्द थे ‘वन्दे मातरम’् ॥ ६ ॥

स्वतंत्र भारत की शक्ति थी वन्दे मातरम् ।
मातृभूमि के प्रति प्रेम व्यक्त करने कि भावना है वन्दे मातरम् ॥ ७ ॥

क्या वो त्याग, वो निष्ठा, वो प्रेम सब व्यर्थ हो गया ?
क्या क्रांतिकारियों ने पाकिस्तान की स्वतंत्रता के लिए कहा था वन्दे मातरम् ?

नहीं ना…..

एक बार नहीं, सौ बार नहीं, हर बार यही कहनाहोगा । इस देश में रहना है, तो ‘वन्दे मातरम्’ कहना होगा, उसका सम्मान करना ही होगा !!

भारतमाता की जय ।’

– श्री. हर्षद खानविलकर, युवा संघटक, हिंदु जनजागृती समिती, मुंबई. (२४.१०.२०१८)

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