हरिद्वार कुंभमेला में जाली कोरोना रिपोर्ट मामले में ई.डी. का ४ राज्यों में छापा

हरिद्वार में अप्रैल माह में हुए कुंभ मेले के आयोजन के समय कोरोना जांच में हुए घोटाला के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने (ई.डी.ने) उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और दिल्ली में कुछ पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं पर छापे मारे ।

वुहान (चीन) में एक वर्ष उपरांत पुन: मिला कोरोना का रोगी !

चीन के वुहान में कोरोना की उत्पत्ति हुई थी और उसके उपरांत चीन ने उस पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया था, किन्तु अब पुन: वुहान शहर में कोरोना का एक रोगी मिला है ।

(कहती हैं) ‘ओणम् त्योहार के समय भीड न होने दें !’

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने राज्य में बढती हुई कोरोना संक्रमित रोगियों की संख्या को देखते हुए हिन्दुओं को ओणम् त्योहार के समय में भीड न होने देने, छोटे बच्चों से मिलना टालने और संबंधियों को मिलना टालने का, निःशुल्क परामर्श दिया है ।

कोरोना रोगियों के लिए गुणकारी प्रमाणित अश्वगंधा औषधि पर ब्रिटेन में शोधकार्य !

कहां आधुनिक चिकित्सकीय शास्त्र को श्रेष्ठ मानकर आयुर्वेद को न्यून माननेवाले भारत के कथित विज्ञानवादी, तो कहां आयुर्वेद पर शोधकार्य कर उसका लाभ अपने देश को कराने का प्रयास करनेवाला ब्रिटेन !

चीन को कोरोना का ‘सुपर स्प्रेडर’ कहने पर भारतीय मासिक पर चीन में प्रतिबंध !

भारत विरोधी वृत्त छापने वाले ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉशिंगटन पोस्ट’, बीबीसी आदि विदेशी प्रसार माध्यमों पर भारत कब प्रतिबंध लगाएगा ?

असम शासन द्वारा कोरोना के कारण मृत रोगियों की पत्नियों को ढाई लाख रुपयों की सहायता !

असम सरकार द्वारा राज्य में कोरोना से मृत रोगियों की पत्नियों को एक ही बार में २ लाख ५० सहस्र रुपयों की सहायता देने की योजना आरंभ की है ।

‘बकरी ईद’ के कारण केरल में कोरोना का भीषण प्रकोप : एक दिन में २२ सहस्र से अधिक व्यक्ति संक्रमित  !

ईद के कारण कोरोना का बडी मात्रा में संक्रमण होने की सामाजिक माध्यमों पर चर्चा !

अमेरिका में पुनः मिल रहे हैं कोरोना के सर्वाधिक रोगी !

जिन नागरिकों ने टीके की दोनों खुराक ले ली हैं, उन्हें भी पुनः मास्क पहनना होगा !

‘फाइजर’ एवं ‘एस्ट्राजेनेका’ टीकों की दोनों खुराक लेने के उपरांत १० सप्ताह में ५० प्रतिशत कम हो जाता है प्रभाव ! – ‘यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन’ का निष्कर्ष

यह निष्कर्ष १८ वर्ष से अधिक आयु के ६०० लोगों के एक अध्ययन के उपरांत निकाला गया है । इसमें व्यक्तियों की आयु तथा उनकी अन्य व्याधियों का विचार नहीं किया गया था ।

भिखारियों को भीख मांगने से नहीं रोक सकते ! – सर्वोच्च न्यायालय

स्वतंत्रता के पश्चात भिखारियों की समस्या का समाधान भारत नहीं कर सका, यह लज्जाजनक है  !