परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘हमारी पीढी ने वर्ष १९७० तक सात्त्विकता अनुभव की; पर आगे की पीढी ने वर्ष २०१८ तक अल्प मात्रा में अनुभव की और आगे वर्ष २०२३ तक अनुभव नहीं कर पाएंगे । उसके उपरांत की पीढी हिन्दू राष्ट्र में सात्त्विकता पुनः अनुभव करेगी !’

सप्तर्षियों का ५.७.२०२० को गुरुपूर्णिमा के (व्यासपूर्णिमा के) उपलक्ष्य में साधकों के लिए संदेश !

गुरुकृपा अर्थात गुरु की छत्रछाया ! यह छत्रछाया साधकों के लिए एक प्रकार का रक्षाकवच है । साधकों का गुरुदेवजी की छत्रछाया में रहना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । गुरुदेव ने अब अपने दोनों आध्यात्मिक उत्तराधिकारियों को अपनी शक्ति दी है ।

‘आपातकाल में मार्ग दिखाने हेतु ईश्‍वरस्वरूप तीन गुरु मिलना’, यह सनातन के साधकों का सौभाग्य !

आजकल संपूर्ण पृथ्वी पर ‘कोरोना’ विषाणुरूपी संकट मंडरा रहा है । यह संकटकाल ही है । इसके कारण विश्‍व के सभी राष्ट्र, समाज के लोग भय और चिंता से ग्रस्त हैं । कई करोड लोग केवल एक बार का भोजन कर पा रहे हैं, तो अनेक लोगों के घर भी नहीं रह गए हैं ।

‘तन, मन, धन एवं जीवन समर्पित कर निःस्वार्थभाव से राष्ट्र-आराधना कैसे करनी चाहिए ?’, इसके आदर्श एवं मूर्तिमंत उदाहरण हैं परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

‘‘हमारे राष्ट्र का प्रातिनिधिक स्वरूप है परात्पर गुरु डॉक्टरजी का शरीर ! परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने बहुत पहले ही कहा है, ‘जिस समय हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होकर राष्ट्र को स्थिरता प्राप्त होगी, उस समय मेरे सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे और मैं स्वस्थ हो जाऊंगा’ ।’’

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने साधक-कलाकारों के समक्ष रखा ध्येय !

परात्पर गुरु डॉक्टरजी ने ‘ईश्‍वरप्राप्ति हेतु कला’ के माध्यम से कला के सात्त्विक प्रस्तुतीकरण संबंधी मार्गदर्शन किया ।उसके साथ ही अखिल मानवजाति के लिए उपयुक्त ‘धरोहर’ के रूप में साधकों द्वारा किया जा रहा ध्वनिचित्रीकरण अच्छा होने के लिए परात्पर गुरु डॉक्टरजी ध्वनिचित्रीकरण और ध्वनिचित्र-संकलन करनेवाले साधकों को उपयुक्त सुधार बताते हैं ।

आगामी आपातकाल में जीवित रहने के लिए पहले से की जानेवाली व्यवस्था

अखिल मानवजाति को आपातकाल में जीवित रहने की तैयारी करने संबंधी मार्गदर्शन करनेवाले एकमेव परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी ! बाढ, भूकंप, तृतीय विश्‍वयुद्ध, कोरोना महामारी आदि संकटों से भरे आपातकाल में अपनी रक्षा के लिए की जानेवाली पूर्वतैयारी संबंधी इस लेखमाला के पहले भाग में चूल्हा, गोबर-गैस आदि के विषय में आपने पढा । … Read more

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का गुरुपूर्णिमा निमित्त संदेश

गुरुपूर्णिमा सनातन संस्कृति को प्राप्त गौरवशाली गुरुपरंपरा को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करने का दिन है । जिस प्रकार गुरु का कार्य समाज को आध्यात्मिक उन्नति के लिए मार्गदर्शन करना है, उसी प्रकार समाज को कालानुसार मार्गदर्शन करना भी गुरुपरंपरा का कार्य है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

बुढापा आने पर ही, बुढापा क्या होता है ? यह समझ मे आता है ।  उसका अनुभव होने पर बुढापा देनेवाला पुनर्जन्म नहीं चाहिए, ऐसे लगने लगता है; किन्तु तब तक साधना कर पुनर्जन्म टालने का समय चला गया होता है ।

आगामी आपातकाल में जीवित रहने के लिए पहले से की जानेवाली व्यवस्था

विश्‍वयुद्ध, भूकंप, विकराल बाढ आदि के रूप में महाभीषण आपातकाल तो अभी आना शेष है । यह महाभीषण आपातकाल निश्‍चित आएगा, यह बात अनेक नाडीभविष्यकारों और द्रष्टा साधु-संतों ने बहुत पहले ही बता दी है । उन संकटों की आहट अब सुनाई देने लगी है ।

घोर आपातकाल में नई-नई आध्यात्मिक उपचार-पद्धतियों का शोध कर मानवजाति के कल्याण हेतु परिश्रम करनेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

सामान्य लोगों में अपने आस-पास अथवा हमारे जीवन में होनेवाली गतिविधियों के संदर्भ में जानने की जिज्ञासा होती है । आगे की साधनायात्रा में साधक के मन में मैं कहां से आया, मेरा लक्ष्य क्या है, मुझे कहां जाना है ? आदि प्रश्‍न उठते रहते हैं ।