आगामी आपातकाल में जीवित रहने के लिए पहले से की जानेवाली व्यवस्था

अखिल मानवजाति को आपातकाल में जीवित रहने की तैयारी करने संबंधी मार्गदर्शन करनेवाले एकमेव परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी ! बाढ, भूकंप, तृतीय विश्‍वयुद्ध, कोरोना महामारी आदि संकटों से भरे आपातकाल में अपनी रक्षा के लिए की जानेवाली पूर्वतैयारी संबंधी इस लेखमाला के पहले भाग में चूल्हा, गोबर-गैस आदि के विषय में आपने पढा । … Read more

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचितशक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी का गुरुपूर्णिमा निमित्त संदेश

ईश्‍वर की भक्ति अथवा साधना करने से ईश्‍वर की कृपा तो होती ही है; और मनुष्यजन्म का भी कल्याण ही होता है । इसलिए इस गुरुपूर्णिमा से प्रतिदिन साधना करने का निश्‍चय करें । – (श्रीचित्शक्ति) श्रीमती अंजली गाडगीळ

आगामी आपातकाल में जीवित रहने के लिए पहले से की जानेवाली व्यवस्था

विश्‍वयुद्ध, भूकंप, विकराल बाढ आदि के रूप में महाभीषण आपातकाल तो अभी आना शेष है । यह महाभीषण आपातकाल निश्‍चित आएगा, यह बात अनेक नाडीभविष्यकारों और द्रष्टा साधु-संतों ने बहुत पहले ही बता दी है । उन संकटों की आहट अब सुनाई देने लगी है ।

आगामी भीषण आपातकाल में स्वास्थ्य रक्षा हेतु उपयुक्त औषधीय वनस्पतियों का रोपण अभी से करें !

संकटकाल में औषधीय वनस्पतियों का उपयोग कर, हमें स्वास्थ्यरक्षा करनी पडेगी । उचित समय पर उचित औषधीय वनस्पतियां उपलब्ध होने हेतु वे हमारे आसपास होनी चाहिए । इसके लिए अभी से ऐसी वनस्पतियों का रोपण करना समय की मांग है ।

भावी महाभीषण संकटकाल की दृष्टि से आयुर्वेदीय और होमियोपैथी औषधियां, साथ ही योगासन और प्राणायाम के महत्त्व पर ध्यान दें !

आजकल कई लोग मधुमेह, रक्तचाप, हृदयरोग, तीव्र आम्लपित्त (हाइपर एसिडिटी), घुटनों के दर्द जैसे कई विकारों पर वर्षों से एलोपैथी औषधियों का सेवन कर रहे हैं । उन्हें इन एलोपैथी औषधियों की इतनी आदत पड गई है कि वे इन औषधियों के बिना जीने का विचार भी नहीं कर सकते ।