जलप्रलय की दृष्टि से भौतिक स्तर पर कौनसी तैयारियां करनी चाहिए ?

वर्षा ऋतु में अतिवृष्‍टि होने से जलप्रलय आता है । अन्‍य ऋतुआें में में भी बादल फटने से जलप्रलय आ सकता है । ‘भविष्‍य में ऐसी स्‍थिति कब उत्‍पन्‍न हो सकती है, यह बताना संभव नहीं है । इसलिए बाढग्रस्‍त क्षेत्र के नागरिकों को किस प्रकार तैयारियां करनी चाहिए, इसके संदर्भ में आगे मार्गदर्शक आलेख दिए गए हैं ।

अधिक अथवा ‘पुरुषोत्तम मास’ का महत्त्व, इस अवधि में किए जानेवाले व्रत, पुण्य कारक कृत्य और इन्हें करने का अध्यात्मशास्त्र !

अधिक मास में सूर्य किसी भी राशि में संक्रमण नहीं करता अर्थात अधिक मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती । इस कारण चंद्र और सूर्य की गति में अंतर पडता है और वातावरण में भी ग्रहणकाल की भांति बदलाव आते हैं ।

चीन की बहुआयामी जासूसी और भारत का उत्तर

चीन की गुप्‍तचर संस्‍थाएं भारत में किस प्रकार दुष्‍कृत्‍य करती हैं और इसमें उन्‍हें कितनी सफलता मिली है, उनसे अपने देश और स्‍वयं की रक्षा कैसे करनी चाहिए, साथ ही हम देश को भी सुरक्षित रखने में किस प्रकार सहायता कर सकते हैं, इसे हम इस लेख में देखेंगे ।

साम्‍यवादी और जिहादी विचारधारा अधिक असहिष्‍णु और विरोधियों के प्रति निर्दयी होना !

वर्तमान में साम्‍यवादी (कम्‍युनिस्‍ट) और जिहादी उदारवादी (लिबरल) बनने का ढोंग कर रहे हैं । बहुरूपी धूर्त ये साम्‍यवादी और जिहादी संपूर्ण संसार में मानवाधिकार, महिलाआें के अधिकार, अल्‍पसंख्‍यकों के अधिकार, अभिव्‍यक्‍ति स्‍वतंत्रता और सहिष्‍णुता की वकालत करते हुए दिखाई देते हैं ।

‘महर्षि अध्या्त्म विश्वविद्यालय’ का ‘संगीतयोग (संगीत के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति)’ का कार्य

शास्‍त्र में संगीत की परिभाषा ‘गायन, वादन एवं नृत्‍य’ का एकत्रित संयोग ‘संगीत’ कहलाता है, ऐसी बताई गई है । भारतीय गायन, वाद्य और नृत्‍य कलाओं का शास्‍त्रीय आधार है ।

देहली में शिक्षक दिन के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम

 देहली – युवाओं को ऐसी तकनीकी शिक्षा मिले, जिससे वे नौकरी की जगह स्‍वयं जीविकोपार्जन कर सकें े। राष्‍ट्रीयता की भावना का विकास हो, ऐसे शिक्षा की आज आवश्‍यकता है ।

श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी का परिचय

श्रीसत्‌शक्‍ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी पूर्णकालिक साधना करने से पूर्व एक अधिकोष में ‘मैनेजर’ के पद पर कार्यरत थीं । उनके पति पू. नीलेश सिंगबाळजी सनातन संस्‍था के ७२ वें संत हैं ।

कोरोना महामारी के कारण उत्‍पन्‍न तनाव पर साधना ही एकमात्र उपाय है ! – श्रीमती प्राची जुवेकर, सनातन संस्‍था

उत्तर प्रदेश – कोरोना महामारी के प्रादुर्भाव से उत्‍पन्‍न परिस्‍थिति के कारण शिक्षकों पर कार्यभार बढाया गया है । इसके कारण उनमें तनाव, भविष्‍य की चिंता, निराशा इत्‍यादि बढती जा रही है ।

हिन्‍दू जनजागृति समिति आयोजित हिन्‍दू राष्‍ट्र संगठक व प्रशिक्षण अधिवेशन की ‘ऑनलाइन’ बैठक संपन्‍न

 कोलकाता (बंगाल) – हिन्‍दू राष्‍ट्र संगठक अधिवेशन के अंतर्गत पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत के धर्मप्रेमियों के लिए गुटचर्चा का आयोजन किया गया । इस गुटचर्चा में झारखंड, बंगाल, असम, त्रिपुरा, इन राज्‍यों से धर्मप्रेमी सम्‍मिलित हुए थे ।

पितृपक्ष के उपलक्ष्य में किशोरों के लिए दो ऑनलाइन सत्‍संगों का आयोजन

वाराणसी (उ.प्र.) – सनातन संस्‍था की ओर से पितृपक्ष के उपलक्ष्य में ९ वर्ष से १३ वर्ष की किशोर अवस्‍था के बच्‍चों के लिए पितृपक्ष से संबंधित धर्मशास्‍त्र पर आधारित ‘ऑनलाइन’ बालसत्‍संग का आयोजन किया गया ।