‘स्‍वयं की चल एवं अचल संपत्ति का ‘सत्‍पात्रे दान’ हो; इस उद्देश्‍य से सनातन संस्‍था को दान देने के लिए इच्‍छुक हों, तो अपने जीवनकाल में ही उसका अर्पण दें !

‘सनातन संस्‍था विगत अनेक वर्षों से निःस्‍वार्थ भाव तथा निरपेक्ष वृत्ति से धर्मप्रसार का कार्य कर रही है । पूरे भारत के विविध स्‍थानों के साधक अविरत रूप से धर्मप्रसार का कार्य कर रहे हैं तथा इस कार्य में अनेक पाठक, हितचिंतक और धर्मप्रेमी जुडे हैं । सनातन संस्‍था का कार्य देखकर अनेक लोग संस्‍था को विविध रूप में अर्पण देते हैं ।

पाठकों के लिए पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’ पुनः आरंभ !

कोरोना संकट के कारण घोषित ‘जनता कर्फ्‍यू’ व यातायात बंदी के कारण पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’ की छपाई और वितरण में आनेवाली बाधाओं को ध्‍यान में रखकर हम ‘१ अप्रैल से १५ अप्रैल २०२०’ से अंक पाठकों तक नहीं पहुंचा पाए ।

साधको, आश्रम के अन्‍नपूर्णा कक्ष (रसोईघर) की सेवाआें में सहभागी होकर अपनी आध्‍यात्मिक उन्‍नति कर लें !

रामनाथी, गोवा स्‍थित सनातन का आश्रम अर्थात चैतन्‍य का स्रोत ! रामनाथी आश्रम में अन्‍नपूर्णा कक्ष (रसोईघर) की विविध सेवाआें के लिए साधकसंख्‍या अल्‍प पड रही है । यह सेवा करने के लिए शारीरिक क्षमतावाले स्‍त्री और पुरुष साधकों की आवश्‍यकता है ।

जीवन आनंदी एवं चैतन्‍यमयी करने के लिए मार्गदर्शन करनेवाली सनातन की ग्रंथमाला : आचारधर्म

जीवन आनंदी एवं चैतन्‍यमयी करने के लिए मार्गदर्शन करनेवाली सनातन की ग्रंथमाला : आचारधर्म : स्नान से लेकर सांझतक के आचारोंका अध्‍यात्‍मशास्‍त्रीय आधार

सनातन प्रभात का महत्त्व !

सनातन प्रभात के लिए समाचार संकलन, वितरण, लेखा रखना इत्‍यादि सेवा करने से समष्‍टि पुण्‍य मिलता है । यह सेवा करनेवाले कुछ साधकों की आध्‍यात्मिक उन्‍नति भी हुई है ।’
– परात्‍पर गुरु परशराम पांडे, सनातन आश्रम, देवद, पनवेल. (११.९.२०१६) 

वर्ष २०२० की वास्‍तविकता !

आज वास्‍तव में देखा जाए, तो कोरोना महामारी के कारण पिछले ६ महीने से भी अधिक समय से देश ठप्‍प हुआ है । भले ही ऐसा हो; परंतु ‘सनातन प्रभात’ के माध्‍यम से इस महामारी का सामना करने के लिए विविध उपाय निरंतर प्रकाशित किए जा रहे हैं ।

हिन्दी पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’ संबंधी पाठकों के विचार

हिन्दुओं को जागृत करने के लिए ‘सनातन प्रभात’ सबसे अच्छी पत्रिका है । मेरी इच्छा है कि यह पत्रिका अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे ।

सनातन प्रभात द्वारा अंगीकृत उच्‍च आध्‍यात्मिक विचारधारा ही सनातन प्रभात और अन्‍य समाचार-पत्रों में मूलभूत भेद !

‘सनातन प्रभात की सेवा करते समय साधकोंको आनन्‍द मिलता है । १२-१३ घण्‍टों तक सेवा करनेपर भी उत्‍साह बना रहता है ।

ऐतिहासिक, सांस्‍कृतिक और पौराणिक प्रमाणों के अनुसार भारत मानवसृष्‍टि का पहला राष्‍ट्र होना और वेदों में भी वैसा उल्‍लेख होना

सभी प्रकार के ऐतिहासिक, सांस्‍कृतिक और पौराणिक प्रमाणों से यह स्‍पष्‍ट हुआ है कि भारत मानवसृष्‍टि का पहला राष्‍ट्र है । वेदों में भी ३४ स्‍थानों पर राष्‍ट्र का उल्‍लेख आया है । यदि राष्‍ट्र ही नहीं रहा, तो राष्‍ट्रीयता, राष्‍ट्रप्रेम और राष्‍ट्रभक्‍ति की भावना देश की भावी पीढी में जागृत रखना कैसे संभव होगा ?