सनातन संस्‍था के हितचिंतक श्री. सचिन कपिल के पिताजी की मृत्‍यु के उपरांत तेरहवीं के दिन पर ‘ऑनलाइन साधना सत्‍संग’ का आयोजन !

मृत्‍यु के उपरांत पूर्वजों की अतृप्‍त आत्‍मा को सद़्‍गति मिलने के लिए हमें क्‍या प्रयास करने चाहिए, पूर्वजों से होनेवाले कष्‍ट निवारण हेतु भगवान दत्तात्रेय के नामजप का महत्त्व, साधना और कालानुसार नामजप का महत्त्व आदि विषयों पर हिन्‍दू जनजागृति समिति के प्रवक्‍ता श्री. नरेंद्र सुर्वे ने अपने विचार प्रस्‍तुत किए ।

भूमि खरीद और ठेकेदार से घर का निर्माण करवाते समय संभावित धोखाधडी टालने हेतु कानूनी बातों की आपूर्ति करें !

अनेक बार हम खाली भूमि खरीदते हैं अथवा खाली भूमि पर निर्माणकार्य करते हैं । सर्वप्रथम आपातकाल की दृष्टि से निर्माणकार्य के लिए भूमि का चुनाव करते समय उसके सभी मापदंडों की पडताल करें । खाली भूमि खरीदते समय अथवा उस पर निर्माणकार्य करने से पूर्व अनेक दस्तावेजों की पडताल कर लेना महत्त्वपूर्ण होता है ।

हिन्दु्ओ, राष्ट्र् एवं धर्म हानि रोकने हेतु जागृत हों !

‘धर्म’ राष्‍ट्र का प्राण है । राष्‍ट्र एवं धर्म की रक्षा करनी हो, तो उस विषय में समाज में वैचारिक क्रांति की ज्‍वाला भडकाना आवश्‍यक है । ऐसी वैचारिक क्रांति से प्रेरित समाज ही अपनी, अपने परिवार की, समाज की और राष्‍ट्र की रक्षा करेगा, यह बतानेवाली ग्रंथमाला !

देवता को भावपूर्ण भोग चढाकर उसे ‘प्रसाद’ के भाव से ग्रहण करने पर व्यक्ति को मिलनेवाले आध्यात्मिक लाभ !

‘हिन्‍दू धर्म में देवता को भोग चढाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है । ‘देवता को भोग चढाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करनेवाले व्‍यक्‍ति पर आध्‍यात्मिक दृष्‍टि से क्‍या परिणाम होता है ?’ परीक्षण में प्राप्‍त निरीक्षणों का विवेचन, उनसे प्राप्‍त निष्‍कर्ष और उनका अध्‍यात्‍मशास्‍त्रीय विश्‍लेषण आगे दिया गया है ।

गुणवत्तापूर्ण गणतंत्र के लिए मूलभूत अधिकार होने चाहिए !

देश में वर्ष १९७५ में आपात्‍काल घोषित किया गया था, उस समय यही प्रश्‍न उपस्‍थित हुआ था । तत्‍कालीन शासन ने आपात्‍काल की घोषणा कर मूलभूत अधिकारों पर बंधन डाले थे । साथ ही आंतरिक रक्षा का कारण बताकर लाखों लोगों को कारागार में डाला था ।

आओ देशभक्त बनें, सुराज्य लाएं !

२६ जनवरी, भारत का गणतंत्र दिवस ! परंतु आज वास्‍तविक अर्थों में देश में गणतंत्र है ही नहीं ! क्‍योंकि आज भी पानी, सडक आदि मूलभूत आवश्‍यकताओं के लिए भी आंदोलन करने पडते हैं ।

विद्यार्थियो, राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य निभाकर राष्ट्राभिमानी बनें !

राष्‍ट्र के प्रतीक कौन से हैं ? राष्‍ट्रध्‍वज, राष्‍ट्रगीत, ‘वन्‍दे मातरम्’ जैसा राष्‍ट्रीय गीत, राष्‍ट्र का मानचिह्न आदि हमारे राष्‍ट्रीय प्रतीक हैं । इनका यथोचित सम्‍मान करना, हमारा राष्‍ट्रकर्तव्‍य है ।

पांच सितारा होटल और रामनाथी आश्रम के रसोईघर में सेवा करते समय ध्यान में आए अंतर और प्राप्त अनुभूतियां

‘पांच सितारा होटल के रसोईघर में भोजन बनानेवाले व्‍यक्‍ति को कितना कष्‍ट होता है, यह इस लेख से स्‍पष्‍ट होता है । ऐसा होते हुए भी उस भोजन को खानेवालों को कितना कष्‍ट होता होगा, इसकी कल्‍पना भी नहीं की जा सकती !’ – (परात्‍पर गुरु) डॉ. आठवले

‘तक्षशिला विश्‍वविद्यालय प्राचीन पाकिस्‍तान का प्रदेश है !’

इस्‍लामाबाद (पाकिस्‍तान) – स्‍वयं को वियतनाम का राजदूत बतानेवाले अब्‍बास खोखर ने ट्‍विटर पर भारत के लिए आदर्श तक्षशिला विश्‍वविद्यालय का चित्र पोस्‍ट कर उसे ‘प्राचीन पाकिस्‍तान’ बताया है ।
१. खोखर ने तक्षशिला विश्‍वविद्यालय के चित्र पर ट्‍वीट करते हुए कहा कि ‘यह अंतरिक्ष से दिखाई देनेवाला तक्षशिला का दृश्‍य है, जिसे पुनः बनाया गया है । २ सहस्र ७०० वर्ष पूर्व यह विश्‍वविद्यालय इस्‍लामाबाद के पास था ।

‘आपातकाल में प्राणरक्षा’ ग्रंथमाला के अंतर्गत सनातन के आगामी २ नए ग्रंथों का लोकार्पण !

आपातकाल में जीवित रहने के लिए मार्गदर्शन करनेवाली सनातन संस्था ! अखिल मानवजाति को आपातकाल में जीवित रहने के लिए तैयारी करने के संदर्भ में मार्गदर्शन करनेवाले एकमात्र परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी ! खंड १ : आपातकाल में जीवित रहने हेतु दैनिक आवश्यकताओं की व्यवस्था करें ! (भोजन, पानी, बिजली आदि संबंधी व्यवस्था) खंड … Read more