परात्‍पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्‍वी विचार

माया के विषय लोग शीघ्र भूल जाते हैं । इसलिए पहला और दूसरा विश्‍वयुद्ध ही नहीं, नोबल पुरस्‍कार प्राप्‍त करनेवाले शास्‍त्रों के नाम भी २५ से ५० वर्ष तक लोगों के स्‍मरण में नहीं रहते । इसके विपरीत, अध्‍यात्‍म का इतिहास और उसके ग्रंथ युगों-युगों तक मनुष्‍य के स्‍मरण में रहते हैं; क्‍योंकि वे मानव का मार्गदर्शन करते हैं !

नेटफ्लिक्स’ पर प्रकाशित ‘लूडो’ फिल्म में भी हिन्दू देवी-देवताओं का अनादर !

वेब सीरीज ‘ए सूटेबल बॉय’ में एक मुसलमान लडका मंदिर परिसर में हिन्‍दू लडकी का चुंबन ले रहा है, यह दृश्‍य दिखाया गया है, तो नेटफ्‍लिक्‍स पर दीपावली में प्रदर्शित फिल्‍म ‘लूडो’ में भी हिन्‍दू देवी-देवताओं को बहुरूपियों के रूप में दिखाकर उनका अनादर किया गया है ।

आयुर्वेद व भारत का दायित्व

भारत को ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्‍यात्मिक धरोहर प्राप्‍त होने से देश सभी स्‍तरों पर वैभवसंपन्‍न और बलशाली बना है । इन सब के साथ ही भारत को आयुर्वेदशास्‍त्र की भी देन है । आयुर्वेद का आरंभ ब्रह्माजी से हुआ है तथा अनुमानत: ३ सहस्र वर्षों से चली आ रही व्‍यापक एवं उच्‍च परंपरा उसे प्राप्‍त है ।

शिनजियांग के मुसलमानों पर चीन के अत्याचार !

चीन की जनसंख्‍या लगभग १३५ सेे १४० करोड है और अल्‍पसंख्‍यक चीनी जनसंख्‍या के १० प्रतिशत हैं । शिनजियांग में २ करोड उघूर मुसलमान रहते हैं । तिब्‍बत में ५० लाख तिब्‍बती रहते हैं । जहां-जहां चीन के विरुद्ध बोला जाता है, वहां चीन भीषण दमन करता है और उन लोगों को दबाने का प्रयास करता है ।

मणिपुर शासन के पाठ्यक्रम में संस्कृत भाषा को समाविष्ट करने का विद्यार्थी संगठन का विरोध

कंगपोकपी जिले के सनातन संस्‍कृत विद्यालय की भेंट के समय राज्‍य के शिक्षामंत्री एस. राजेन ने सरकार की योजना के विषय में पत्रकारों को बताया कि मणिपुर विश्‍वविद्यालय इस विषय के लिए अलग विभाग आरंभ करने का विचार कर रहा है ।

भगवान दत्तात्रेय के तारक और मारक नामजप का तीव्र आध्‍यात्मिक कष्‍ट से पीडित साधकों पर हुआ परिणाम

समाज के अनेक लोगों को अनिष्‍ट शक्‍तियों का (आध्‍यात्मिक) कष्‍ट होता है । अनिष्‍ट शक्‍तियों के कारण व्‍यक्‍ति को शारीरिक और मानसिक कष्‍ट होते हैं तथा जीवन में अन्‍य बाधाएं भी आती हैं । अनिष्‍ट शक्‍तियों के कष्‍ट के कारण साधकों की साधना में भी बाधाएं आती हैं; परंतु दुर्भाग्‍य से अनेक लोग इस कष्‍ट से अनभिज्ञ होते हैं ।

आपराधिक पृष्‍ठभूमि के नेताआें के विरुद्ध कार्रवाई न होना, लोकतंत्र की शोकांतिका है !

‘भारतवर्ष में प्रभु श्रीराम, विक्रमादित्‍य, चंद्रगुप्‍त, समुद्रगुप्‍त, हरिहर एवं बुक्‍क जैसे अनेक तेजस्‍वी एवं धर्माधिष्‍ठित राजा हुए । महाराष्‍ट्र को तो छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज और पेशवा के रूप में धर्माधिष्‍ठित राजा मिले, जिन्‍होंने वास्‍तव में श्रीविष्‍णु की भांति अपनी प्रजा का रक्षण और पालन-पोषण किया; परंतु वर्तमान लोकतंत्र में इसका ठीक उलटा अनुभव हो रहा है ।

भारत-चीन सीमाविवाद के समझौते के लिए ‘शिमला समझौता’

१०६ वर्ष पूर्व लंडन के सरकारी मुख्‍यालय से शिमला को एक तार भेजा गया; किंतु तार पहुंचने में विलंब हुआ और तभी ‘मैकमोहन रेखा’ नाम की संतति ने जन्‍म लिया । वर्ष १९७१ के भारत-पाकिस्‍तान युद्ध के उपरांत इन देशों के मध्‍य हुआ ‘शिमला समझौता’ सभी को ज्ञात है ।

ऐतिहासिक, सांस्‍कृतिक और पौराणिक प्रमाणों के अनुसार भारत मानवसृष्‍टि का पहला राष्‍ट्र होना और वेदों में भी वैसा उल्‍लेख होना

सभी प्रकार के ऐतिहासिक, सांस्‍कृतिक और पौराणिक प्रमाणों से यह स्‍पष्‍ट हुआ है कि भारत मानवसृष्‍टि का पहला राष्‍ट्र है । वेदों में भी ३४ स्‍थानों पर राष्‍ट्र का उल्‍लेख आया है । यदि राष्‍ट्र ही नहीं रहा, तो राष्‍ट्रीयता, राष्‍ट्रप्रेम और राष्‍ट्रभक्‍ति की भावना देश की भावी पीढी में जागृत रखना कैसे संभव होगा ?

सनातन के गुरु-शिष्‍य संबंधी ग्रंथ पढें !

शिष्‍य को केवल गुरुकृपा से ही मोक्ष प्राप्‍त हो सकता है ! – ग्रंथ – गुरुका महत्त्व, प्रकार एवं गुरुमन्‍त्र
ग्रंथ – गुरुका शिष्‍योंको सिखाना एवं गुरु-शिष्‍य सम्‍बन्‍ध