परात्‍पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्‍वी विचार

माया के विषय लोग शीघ्र भूल जाते हैं । इसलिए पहला और दूसरा विश्‍वयुद्ध ही नहीं, नोबल पुरस्‍कार प्राप्‍त करनेवाले शास्‍त्रों के नाम भी २५ से ५० वर्ष तक लोगों के स्‍मरण में नहीं रहते । इसके विपरीत, अध्‍यात्‍म का इतिहास और उसके ग्रंथ युगों-युगों तक मनुष्‍य के स्‍मरण में रहते हैं; क्‍योंकि वे मानव का मार्गदर्शन करते हैं !

प्रतिदिन बालसाधकों की व्‍यष्‍टि साधना का ‘ऑनलाइन’ ब्‍योरा लेने का नियोजन करें !

आज के बाल एवं युवा साधक हिन्‍दू राष्‍ट्र की भावी पीढी है । उन्‍हें उचित मार्गदर्शन मिले, तो उनकी शीघ्र आध्‍यात्मिक उन्‍नति हो सकती है । वर्तमान में विदर्भ के बालसाधकों की व्‍यष्‍टि साधना का प्रतिदिन ब्‍योरा लिया जा रहा है । इससे यह समझ में आया कि ‘उनके साधना के प्रयासों में गति आई ।

साधकों के लिए सूचना और पाठक, हितचिंतक और धर्मप्रेमियों से नम्र विनती !

वर्तमान में कोरोना महामारी के कारण अनेक प्रतिष्ठान बंद हो गए हैं तथा सर्वत्र बेरोजगारी बढी है । इस परिस्थिति का दुरुपयोग कर कुछ व्यक्ति सहस्रों-लाखों रुपयों की लॉटरी लगने अथवा मूल्यवान वस्तुआें के पारितोषिक मिलने के संदेश, ऑडियो मेसेज, लिंक सर्वत्र प्रसारित कर रहे हैं ।

विजयादशमी से हिन्‍दू समाज और देशहित की रक्षा के लिए सीमोल्लंघन करें !

‘वर्ष २०२१ ते २०२३ का काल जागतिक विश्‍वयुद्ध का होगा । इस काल में भारतीय सेना को भी सीमोल्लंघन करना
पडेगा ।

महाभीषण आपातकाल की दृष्टिी से आयुर्वेदिक और ‘होमियोपैथिक’ औषधियां तथा योगासन और प्राणायाम का महत्त्व ध्यान में लें !

वर्तमान में अनेक लोग मधुमेह, रक्‍तचाप, हृदयरोग, तीव्र आम्‍लपित्त (हाइपर एसिडिटी), घुटनों में वेदना जैसे अनेक विकारों पर अनेक वर्षों से ‘एलोपैथिक’ औषधियां ले रहे हैं ।

‘ऑनलाइन’ नवम ‘अखिल भारतीय हिन्‍दू राष्‍ट्र अधिवेशन’ हेतु संदेश

युद्धकाल में सत्त्वगुणी हिन्‍दुआें की रक्षा करने की तैयारी करें ! नवम ‘अखिल भारतीय हिन्‍दू राष्‍ट्र अधिवेशन’ में उपस्‍थित सर्व धर्मबंधुआें को मेरा नमस्‍कार ! हिन्‍दू राष्‍ट्र की स्‍थापना का ध्‍येय रखकर आप सभी त्‍याग कर रहे हैं । वर्ष २०२३ में इस त्‍याग का फल निश्‍चित ही हमें हिन्‍दू राष्‍ट्र के रूप में मिलेगा … Read more