देवता को भावपूर्ण भोग चढाकर उसे ‘प्रसाद’ के भाव से ग्रहण करने पर व्यक्ति को मिलनेवाले आध्यात्मिक लाभ !

‘हिन्‍दू धर्म में देवता को भोग चढाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है । ‘देवता को भोग चढाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करनेवाले व्‍यक्‍ति पर आध्‍यात्मिक दृष्‍टि से क्‍या परिणाम होता है ?’ परीक्षण में प्राप्‍त निरीक्षणों का विवेचन, उनसे प्राप्‍त निष्‍कर्ष और उनका अध्‍यात्‍मशास्‍त्रीय विश्‍लेषण आगे दिया गया है ।

पांच सितारा होटल और रामनाथी आश्रम के रसोईघर में सेवा करते समय ध्यान में आए अंतर और प्राप्त अनुभूतियां

‘पांच सितारा होटल के रसोईघर में भोजन बनानेवाले व्‍यक्‍ति को कितना कष्‍ट होता है, यह इस लेख से स्‍पष्‍ट होता है । ऐसा होते हुए भी उस भोजन को खानेवालों को कितना कष्‍ट होता होगा, इसकी कल्‍पना भी नहीं की जा सकती !’ – (परात्‍पर गुरु) डॉ. आठवले

धूप सेवन का उपचार करने से (धूप में रहने से) व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ होना

अभिनव आध्यात्मिक अनुसंधान करनेवाला महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय ‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ द्वारा ‘यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर (यूएएस)’ उपकरण द्वारा किया वैज्ञानिक परिक्षण ‘वर्तमान में अधिकतर लोगों को न्यूनाधिक मात्रा में आध्यात्मिक कष्ट (टिप्पणी) होते हैं । उसी प्रकार, वायुमंडल में रज-तम की मात्रा अत्यधिक मात्रा में बढने के कारण व्यक्ति की देह, मन एवं बुद्धि पर कष्टदायक … Read more

बिजली पर चलनेवाला फ्रीज (रेफ्रिजरेटर) और मिट्टी से बनाए हुए फ्रीज का तुलनात्मक अध्ययन करते समय प्रतीत हुए सूत्र

प्रकृति के विरुद्ध जाकर ठंडे किए हुए पदार्थ हानिकारक होते हैं, साथ ही उनके बासी होने से उनमें समाहित पोषक तत्त्व भी निकल चुके होते हैं ।

भगवान दत्तात्रेय के तारक और मारक नामजप का तीव्र आध्‍यात्मिक कष्‍ट से पीडित साधकों पर हुआ परिणाम

समाज के अनेक लोगों को अनिष्‍ट शक्‍तियों का (आध्‍यात्मिक) कष्‍ट होता है । अनिष्‍ट शक्‍तियों के कारण व्‍यक्‍ति को शारीरिक और मानसिक कष्‍ट होते हैं तथा जीवन में अन्‍य बाधाएं भी आती हैं । अनिष्‍ट शक्‍तियों के कष्‍ट के कारण साधकों की साधना में भी बाधाएं आती हैं; परंतु दुर्भाग्‍य से अनेक लोग इस कष्‍ट से अनभिज्ञ होते हैं ।

‘रेफ्रिजरेटर’ के कारण अन्नि पदार्थों पर होनेवाले दुष्पररिणाम !

इस भागदौड भरे जीवन में समय के अभाव के कारण महिलाएं सप्‍ताह में एक ही बार बाजार से फल, सब्‍जियां एवं अन्‍य पदार्थ लाकर फ्रिज में रखती हैं तथा आवश्‍यकता के अनुसार वे उनका उपयोग करती हैं । इसके कारण शारीरिक स्‍तर पर तो हानि होती ही है; परंतु साथ में आध्‍यात्मिक स्‍तर पर भी उसके दुष्‍परिणाम देखने में आते हैं ।

जोंक के सामने एलोपैथिक, होम्योपैथिक और आयुर्वेदीय औषधि की गोलियां रखने पर उसके द्वारा दिया प्रतिसाद और उसपर हुआ परिणाम

आयुर्वेद के देवता श्री धन्वन्तरी के चित्र में उनके दाहिने हाथ में जोंक दिखाई देती है । सामान्यत:आयुर्वेद में जोंक का उपयोग  शरीर में रक्त संबंधी व्याधि के निवारण हेतु किया जाता है । ३०.७.२०२० को गोवा में सनातन आश्रम के मुख्य प्रवेशद्वार के निकट एक जोंक दिखाई दी । वह सात्त्विक वस्तुआें की ओर आकृष्ट हो रही थी ।

गैस अथवा बिजली का उपयोग कर पकाए गए अन्न की अपेक्षा मिट्टी के चूल्हे पर पकाए अन्न से बडी मात्रा में सकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित होना !

कुछ वर्ष पहले सर्वप्रथम गोबर से भूमि लीपकर, चूल्हे का पूजन कर अग्नि में चावल की आहुति देने के उपरांत ही अन्न पकाने की प्रक्रिया आरंभ की जाती थी । उसके कारण इस अन्न की ओर देवताआें के स्पंदन आकर्षित होते थे । ऐसा अन्न ग्रहण करनेवाले जीवों को उसमें समाहित शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तरों पर भी लाभ मिलता था ।

‘दशहरे के दिन अश्मंणतक की पत्तियों पर होनेवाले सकारात्मक परिणाम’ संबंधी विशेषतापूर्ण अनुसंधान !

अश्‍मंतक के पत्तों पर दशहरे के दिन क्‍या परिणाम होता है  इसका वैज्ञानिक अध्‍ययन करने के लिए रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में ‘महर्षि अध्‍यात्‍म विश्‍वविद्यालय’ की ओर से एक परीक्षण किया गया । इस परीक्षण के लिए ‘यूएएस (यूनिवर्सल ऑरा स्‍कैनर)’ उपकरण का उपयोग किया गया ।

‘इंडक्‍शन’ अंगीठी, ‘गैस’ की अंगीठी और मिट्टी के चूल्‍हे पर रसोई बनाते समय ध्‍यान में आए सूत्र

मनुष्‍य जहां विज्ञान का उदात्तीकरण कर रहा है, उसी समय अनेक पारंपरिक और हमारे पूर्वजों द्वारा दी गई समृद्ध विरासत नष्‍ट होने की स्‍थिति में है । उनमें से एक है मिट्टी का चूल्‍हा !